कड़ी

-देवीसिंघजी रा वगरै पकडि़या ज्यांनूं रस्सासूं बांध भेजनसाळा हेटली ओरियां ज्यांमें घालिया । हाथां पगां में बेड़ी तोखीर कडि़यां आयी नहीं जद कडि़यां मोटी घड़ाय आंरा हाथां-पगां मांह घाली । .....देवीसिंघ प्रभुखांरा हाथ-पग लोहरा बंधणरी कडि़यां घड़ायी, पहलां आंनूं भोजनसाळा हेटली ओरियां मांहे राखिया हुता ।..... ऊदावत केहरसिंघरा गळारा तोखरी कड़ीरी सांकळ भुरसमें दिवी हुती । 15/46.
-ऊदावत कैसरीसिंघ रा गळामें भंवरकड़ी रहती । पालखीखांनामें कैद रहता । सेर पक्कारी नित खीचड़ी खाता । संवत् 1818 रै रामसरण हुवा । 15/46.

कड़ाह

-कनोई गांव, जैसलमेर में पांच-सात बड़े-बड़े कड़ाह आज यों ही बस्तियों में पड़े हैं । बीस वर्श पहले तक इनमें आये दिन गांव की सामूहिक रसोई बना करती थी । इनमें से एक कड़ाही तो इतनी चैड़ी है कि उसमें सात मन मैदे का हलवा बनाया जाता था । -25/135.

अंगवायु

-पशुओं    (गाय, बैल, भैंस, घोड़ा, ऊंट आदि) में होने वाला एक प्रकार का वात रोग विशेष जिसमें पशु का शरीर अकड़ जाता  है, गर्दन और पैर सख्त तथा कठोर हो जाते हैं व चारों पैरों में ग्रंथियां निकल आती हैं ।   -18/7.

अंगवारौ

-किसानों द्वारा खेत आदि पर पारिश्रमिक के आधार पर कार्य न कर परस्पर एक-दूसरे के यहां कार्य करने का भाव ।-18/7.

अंगलेखक

-वह राज्य कर्मचारी जो मृत्यु दण्ड से दण्डित अपराधी के शरीर पर दाग लगाता है ।  -18/7.


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