अलवर

-बाला किला अलवर के पीछे ‘रावणदेहरा’ के प्राचीन भग्नावशेष हैं । इसके संबंध में कहा जाता है कि अलधूरायजी ने इसी स्थान पर अलवर बसाया था । सुल्तान गयासुद्दीन बलवन ने 657 हिजरी में मेवात पर हमला किया और इस हमले में बड़ी संख्या में मेव मारे गये और यह बस्ती उजड़ गई । -25/182.

अमरसागर

-जैसलमेर से लगभग 40 कि.मी. लोद्रवा मार्ग पर महारावल अमरसिंह द्वारा निर्मित सुंदर सरोवर, अमरेश्वर मंदिर, अमरबाग, अनूपबाव व अमर बाव आदि पगबावें बनी हुई हैं । इस सरोवर का निर्माण वि.सं. 1748 की मिगसर वदी 1 सोमवार को करवाया तथा प्रतिष्ठा की । बांध पर गणेश की मूर्ति के नीचे लेख के अनुसार इसका निर्माण कार्य 1745 में प्रारंभ किया
था । बांध के ऊपर अमरेश्वर नामक महादेव का मंदिर बनाकर 1751 में इसकी प्रतिष्ठा की थी । महारानी अनूपदे के नाम पर 1749 वि.सं. की मिगसर सुदि दसम को अनूपबाव नामक सुरम्य पगबाव का निर्माण करवाया था । अनूपबाव के सामने छतरी का निर्माण महारावल जसवंतसिंहजी ने अपनी माता अनूपदे की स्मृति में स्वर्गलोक सिधारने पर वि.सं. 1759 में कराया था । अमरसागर सरोवर के निमित्त महारावल श्री अमरसिंहजी ने वि.सं. 1756 में एक खेत माड़ेत नाम का सोनारे का उदक किया था । इस खेत की आय सरोवर के जीर्णोद्धार व सफाई हेतु खर्च होती थी । अमरसागर सरोवर में वेश्याओं, महारावलों की पासवानों तथा नगरवासियों की तरफ से सुंदर पगबावें बनाई हुई हैं । इसके ऊपर सुदर छतरियों तथा अंदर महल बने हुए हैं । दो मंजिले बंगले, घाटों पर बने हाथी, घोड़े आदि तत्कालीन शिल्पकारों के उच्च ज्ञान और कलाप्रियता के साक्षी हैं । गंगा सप्तमी को यहां मेला लगता है । यहीं पर महेश्वरियों, ओसवालों आदि की बगेचियां बनी हुई हैं, साथ ही भव्य जैन मंदिर बने हैं । -21/238-9.
-रावळ अमरसिंघजी अमरसागर तळाव बंधायोै सं. 1756 की साल, बाग लगायो, बावड़ी 1 बंधाई रा....। 5/78.


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