अठ्ठो

-डिंगल का एक वर्ण छंद/गीत विशेष जिसमें प्रथम चार चरण अर्द्ध नाराच छंद के तथा अंत में एक दोहा होता है ।-18/87.

अठताळौ

-डिंगल का एक गीत/छंद विशेष जिसमें तीन चरण चैदह-चैदह मात्राओं के और चैथा दस मात्राओं का होता है । ;रघुवरजस प्रकाश के अनुसार प्रत्येक चरण का अंतिम वर्ण दीर्घ होता है, इस प्रकार चार चरण फिर कर एक द्वाला बनता
है । चैथे व आठवें चरण का और प्रथम, द्वितीय, पंचम, षष्ठ व सप्तम का तुकांत मिलता है । प्रथम द्वाले के प्रथम पद में 18 मात्राएं होती हैं । -18/84.

अजंगम

-छप्पय नामक मात्रिक छंद का 33वां भेद जिसमें 38 गुरु, 76 लघु से 114 वर्ण या 152 मात्राएं होती हैं ।          -18/74.

अजय

-पराजय, हार ।...छप्पय छंद के 71 भेदों में से प्रथम भेद जिसमें 70 गुरु, 12 लघु से 82 वर्ण या 152 मात्राएं होती हैं-18/76.

अगण

-छंद शास्त्र के आठ गणों में से वे गण जो काव्य रचना में अशुभ माने जाते हैं ।...जिसकी गणना ना हो ।         -18/53.


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