अरधनाराच

-नाराच नामक छंद विशेष का एक भेद जिसके चार चरणों में से प्रत्येक चरण में प्रथम ह्रस्व व फिर लघु के क्रमानुसार 8 वर्ण एवं 12 मात्राएं होती हैं ।  -18/181.

अरधगोखौ

-डिंगल का एक गीत/छंद विशेष जिसके चार चरण होते हैं । प्रत्येक में 20 मात्राएं होती हैं तथा चैथे चरण में वीप्सा अलंकार होता है । चारों चरणों के अंत में तुकांत होता है ।  -18/181.

अरट

-कुए से पानी निकालने का मालाकार यंत्र, रहेंट ।....डिंगल का एक गीत/छंद विशेष जिसके विषम पदों में चार चैकल सहित सोलह मात्राएं होती हैं किन्तु आदि का चरण अपवाद है जिसमें अठारह मात्राएं होती हैं । सम चरणों में दो चैकल और अंत में गुरु-लघु सहित ग्यारह मात्राएं होती हैं । इस प्रकार कुल चार या चार से अधिक द्वाले होते हैें । कविकुल बोघ के अनुसार प्रत्येक चरण में चार भगण तथा अंत में गुरु का एक गीत छंद विशेष ।...एक प्रकार की बंदूक ।        -18/178.

अरधगोख

-डिंगल का एक गीत/छंद विशेष जिसके प्रथम तीन चरणों में प्रत्येक चरण में रमण, जगण और अंत में गुरु और लघु इस क्रम से आठ वर्ण होते हेैं तथा चैथे चरण में रगण व जगण सहित छः वर्ण होते हैं । चारों चरणों के अंत में तुकांत होता है । -18/181.

अमेळ

मेल या मैत्री से रहित मनमुटाव, विरोध, अनमेल, शत्रुता ।....राजस्थानी के छोटे सांणोर गीत/छंद का एक भेद विशेष जिसमें विषम पदों में 16 मात्राएं और समपदों में यदि अंत में गुरू हो तो 14 व लघु होने की अवस्था में 15 मात्राएं होती हैं किन्तु इसके पदों का तुक नहीं मिलता ।  -18/171.


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