अरिल्ल

-एक प्रकार का मात्रिक छंद विशेष जिसके प्रत्येक चरण में सोलह मात्राएं तथा अंत में दो लघु होते हैं ।   -18/187.

अरधसावझड़ौ

-डिंगल का एक गीत/छंद विशेष जिसमें शुद्ध ‘सावझड़े गीत’ के चारों चरणों के समान ही इस गीत के भी चार चरण होते हैं, किन्तु ‘अरध सावझड़ो’ में दो दो चरणों के तुकांत मिलते हैें ;र. रू. व. र. ज. प्र.द्ध  किन्तु मतांतर से चारों चरण मंे सोलह मात्राएं होती हैं तथा चारों चरणों में तुकंात होता है ।  -18/182.

अरधभाखड़ी/अरधभाखरी

-डिंगल का एक गीत/छंद विशेष जो ‘भाखड़ी’ गीत का आधा/चार चरणों का, होता है । इसके प्रथम दो चरण ‘भाखरी गीत’ के तथा तीसरे पद में सिंहावलोकन कर वैताल छंद के दो पद रखे जाते हैं । -18/181.

अरधभुजंगी

-एक छंद विशेष जिसके चार चरणों में से प्रत्येक चरण में दो यगण होते हैं ।  -18/182.

अरधभाख

-डिंगल का एक गीत/छंद विशेष जिसके लक्षण ‘भाख’ गीत के अनुसार ही होते हैं किन्तु तुकांत दो-दो चरणों का मिलता है ।  -18/181.


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