आरय्यागीत

-विषम चरणों में बारह और सम चरणों में बीस मात्राओं का आय्र्या छंद का एक भेद ।   -18/305.

आरय्या

-एक प्रकार का अर्द्ध-मात्रिक छंद विशेष जिसके प्रथम और तृतीय चरण में बारह-बारह तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में पंद्रह-प्रंदह मात्राएं होती हैं । चार मात्राओं का गण इस छंद में समूह कहलाता है । इसके पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें गण में जगण का निषेध है किन्तु छठे गण में जगण होना चाहिए ।       -18/305.

आदिविपुळा-जगनचपळा

-एक छंद विशेष । प्रथम पाद के गणत्रय में अपूर्ण पाद वाली आय्र्या जिसके दूसरे दल में दूसरा और चैथा गण जगण हो । -18/288.

आभीरी

-ईस्वी दूसरी या तीसरी शताब्दी में उत्तर-पश्चिम में प्रचलित भारत की एक प्राचीन भाषा ।  -18/299

आदजुगाद

-सृष्टि के आरंभ से अंत तक । परंपरा का । अति प्राचीन काल का, अनादि काल का ।  -18/286


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