आठी

-आठ छिद्रों वाला ‘पूंगी’ नामक एक वाद्य विशेष ।   -18/277.

आड़ौ-पंचताळ

-संगीत के अन्तर्गत पांच आघात और नौ मात्राओं का एक ताल । -18/271.

अल्लाहजिलाई बाई

-राजस्थान की प्रसिद्ध लोक गायिका स्व.अल्लाहजिल्लाई बाई का जन्म बीकानेर में फरवरी 1902 को हुआ ।...अल्लाह जिल्लाई बाई के अनुसार-‘‘कोई आठ नौ साल की उम्र रही होगी....महाराजा गंगासिंहजी ने पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ संगीत की तालीम दी और भी पूरा ध्यान दिया था । उन्होंने संगीत की तालीम के लिये एक संगीत विद्यालय खोला था.....तेलीवाड़े में, जेल सदर के सामने । शुरू से ही शौक था, उमंग थी । मेरी बुआजी भी संगीत सीखने जाती थी । मैंने भी सीखना शुरू कर दिया । हुसैन बख्शजी हमारे गुरू थे, लंगड़े थे वे । उन्होंने ही मेरा हौंसला बढ़ाया, गाना सिखाया । पहले घर में ही मेरी आवाज परखी, फिर स्कूल ले गये । स्कूल में तीन गवैये थे, खां साहब हुसैन बख्शजी, रूकनद्दीन खां और शमसुद्दीन खां । हम पंन्द्रह सोलह लड़कियां थीं । कत्थक शिवलालजी, अच्छन महाराज, लिच्छु महाराज सिखाते थे । शिब्बू/शिम्भू महाराज ने भी छह महीने स्कूल में काम किया था । मैंने तो शुरू से सिर्फ गाना सीखा । अस्थायी, ख्याल, टप्पा, तराना, मांड, गजल....। 6 घंटे क्लास लगती थी । अस्थायी, मांड, तबला, हारमोनियम....सभी 1-1 घंटा ।

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अस्टताळ

-संगीत में ताल के आठ प्रकार, यथा- आड़, दोज, ज्योति, चन्द्रशेखर, गंजन, पंचताल, रूपक और समताल ।  -18/229. 

अलहिया

-सब कोमल स्वरों की एक रागिनी जो हिंडोल राग की स्त्री कही जाती है ।   -18/194.


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