उत्तरमंद्र

-संगीत की एक मूर्छना ।    -18/383.

उडव

-रागों की एक जाति, वह राग जिसमें पांच स्वर लगें और कोई दो स्वर न लगें ।  -18/374.  

आभीर नट

-नट और आभीर से मिलकर बनने वाला एक संकर राग । -18/299.

आरोह

-चढ़ाव, चढाई । आक्रमण । घोड़े, हाथी आदि पर चढ़ने की क्रिया, सवारी करने का भाव । जीवात्मा की ऊध्र्व गति, या
जीव का क्रमशः उत्तमोत्तम योनियों का प्राप्त करना । विकास, उम्थान । आविर्भाव, अवतार । नारी के नितंब या वक्ष । ऊपर
उठी हुई जगह, उभार । स्वरों का चढ़ाव या नीचे स्वर के पश्चात् क्रमशः ऊंचा स्वर निकालना, स्वरों का सीधा क्रम -सा रे
ग म प ध नि सा । सीढ़ी । ग्रहण के दस भेदों में से एक । सवारी करने वाला, सवार । -18/308.

आणंदभैरवी

-सब कोमल स्वरों वाली भैरव राग की रागिनी ।  -18/292.   


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