आथ

-किसानों के लिये कार्य करने वाले व्यक्तियों का वर्ष भर के लिये निश्चित् कर पारिश्रम के रूप में दिया जाने वाला धान अथवा धन ।...हाथ । -18/283.
-जींवदा गावं, बाली वाले ढोली को प्रतिघर के हिसाब से साल का पचास किलो धान ‘आथ’ के रूप में देते हैं । इसी तरह पराखिया गांव में भी कुम्हार बर्तन बनाते हैं, जिनके पेटे गांव वाले प्रति घर से वर्ष में दस किलो धान ‘‘आथ’’ के रूप में उन्हें देते हैं । -राज. पत्रिका, जोधपुर 19-20.3.1990.

आतमा

-मन या अन्तःकरण से परे उसके व्यापारों का ज्ञान कराने वाली एक अविनाशी, अतीन्द्रिय और अभौतिक शक्ति जो काया में रहने पर उसे जीवित रखती है, आत्मा, जीव, जीवात्मा, चित्त । इसके लक्षण हैं- प्राण, अपान, निमेष, उन्मेष, जीवन और मनोगत इन्द्रियेतर विकार ।...परमात्मा ब्रह्म ।...कामदेव ।...सार, प्रकृति ।...बुद्धि ।...मन ।...विचारण  शक्ति, तर्कशक्ति ।...सप्राणता, जीवन ।...रूप, प्रतिमा ।...पुत्र । ...सूर्य ।...अग्नि ।...पवन, वायु ।...नैसर्गिक प्रकृति या स्वभाव ।...अहंकार । -18/282.

आणंदबधाई

-मंगलोत्सव । मंगलोत्सव के अवसर पर दी जाने वाली शुभकामना ।    -18/280.

आतमवाद

-दार्शनिक क्षेत्र में वह विचारधारा जिसमें आत्मा की सत्ता को स्वीकार कर उसे अजर, अमर, अविकारी और सब व्यापारों का साक्षी माना जाता है ।   -18/282.

आणंदबधाई

-मंगलोत्सव । मंगलोत्सव के अवसर पर दी जाने वाली शुभकामना ।   -18/280.


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