आंणौ

-गौना, विदाई । मायके से बहू अथवा ससुराल से बेटी को लाने का भाव ।...गौना, विवाह के बाद की एक रस्म जिसमें वर वधू को प्रथम बार अपने घर लाता है । बुलावा । -32/90
-शादी के बाद जब बींदनी अपने बाप के घर से दुबारा सुसराल में आती है तो उसको ‘‘आणा’ कहते हैं । उस वक्त बींद का वहां जाना जरूर होता है और जो किसी सबब से न जा सके तो अपने भाई या किसी भले आदमी को भेज देता है और बींद के जाने में खर्च भी जियादा पड़ता है । बींदनी का बाप ‘मुकलावे’ में भी उसके वास्ते गहना और कपड़ा अपनी हैसियत के माफिक बनवाता है जो व्याह से आधा होता है । -6/34-5.

आंजणा

-राजा पृथु ने अपने यज्ञ में जाटों को इकट्ठा किया तो उनके साथ और भी बहुतसे लोग दूसरी कौमों के आ गये थे इसलिये राजा ने जिमाते वक्त पुकार कर कहा कि जो जाट जाट हों वे तो बैठ कर जीमें और बाकी लोग खड़े खड़े खावें सो जाट तो बैठ कर जीम लिये और बाकी लोगों में से जिन जिन ने खड़े खड़े खाना अख्तीयार किया वे भी जाटों में गिने गये लेकिन उनकी संज्ञा आंजणा हुई -‘ऊभा जिके आंजणा जीमा सो जाट’ का ओखांणा उस दिन से चला है । अब जाट और आंजणा मिले जुले हैं मगर उनकी खांपे जुदी जुदी हैं । जाटों की खांपे तो बाप के नामों या राजपूतों के गोतों पर हैं जो बादशाहों के डर से जाटों में मिल गये और आंजणों की खांपे अकसर गांवों के नाम पर हैं जैसे मूंडेल, ईंदाणा, जलवानिया, डीडेल, वरणगंवा, दुगोलिया वगैरा । दूसरे जाटों को तो भाट और डाढ़ी मांगते हैं और आंजणों में पीढि़यां लिखने और मांगने को बड़वे और ढोली आते हैं । 6/48.

आंगळीझल

-पुनर्विवाह के पश्चात् पति घर जाने पर पूर्व पति से उत्पन्न साथ ले जाई गई संतान ।  -18/245.

आंगी/आंगौ

-अंगिया । चोली । कंचुकी ।...स्वभाव, प्रकृति ।...कवच, बख्तर ।...शरीर, अवयव ।...श्रम या कार्य क्षेत्र में समभागित्व या भाग/कृषि ।...रेशम आदि का शरीर पर धारण किया जाने वाला लंबा वस्त्र जिसके किनारों पर जरी का काम किया हुआ होता है और दोनों कंधों एवं पीठ पर सिलमे सितारे के फूल लगे होते हैं ।.....पुरुषों द्वारा शरीर पर धारण किये जाने वाला यह एक मध्य युगीन वस्त्र है जो कमर तक ‘अंगरखी’ के समान और कमर के नीचे पैरों तक लटकता हुआ गोल घेरदार होता है । मध्य युग में राजपूती शासकों द्वारा इसे राजसी पोशाक के रूप में धारण कियाा जाता था । राजपूत सामंत भी प्रायः इसी पोशाक में दरबार में उपस्थित होते थे । आजकल भी ग्रामीण क्षेत्र में कई परिवारों में विवाह के अवसर पर दूल्हा यही पोशाक ‘आंगौ’ धारण करता है । इसके अतिरिक्त लोकपर्वों विशेषकर होली पर्व एवं मेलों आदि के अवसर पर लोग इसी प्रकार की पोशाक धारण कर नृत्य आदि करते हैं । -18/246.

आंगनियौ

-स्त्रियों द्वारा कान की ऊपरी पट्टी में धारण करने का सोने या चांदी का आभूषण विशेष ।  -18/245.


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