नागा साधु

-दादूपंथी साधुओं की एक शाखा ।  
 -देखें ‘दादूपंथ’ ।

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दादू

 -श्री दादूदयाल -जो अकबरकालीन एक प्रसिद्ध निर्गुणी साधु ।
-देखें ‘दादूपंथ’ ।

संत चूनाराम

 -आधुनिक काल के संत-महात्माओं में बन्जारा जाति में उत्पन्न संत चूनाराम का विशेष स्थान है । इनके लिखे ‘‘श्रीवेदान्त प्रश्नोत्तरी‘ तथा‘श्री अनुभव पदावली’ महत्वपूर्ण ग्रंथ
हैं । लोक जीवन को मद्यपान, जुआ, चोरी, वैश्यावृत्ति, हिंसा और मांस भक्षण जैसे दुर्गुणों से बचने का संदेश देकर मानव सेवा, कर्त्तव्यनिष्ठा तथा भगवद् भक्ति की ओर प्रवृत्त करने में चूनाराम ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया -
                           ‘‘जगत में सात व्यसन दुःखदाई,
                            जो कोई सात व्यसन को भोगे, घोर नरक में जाई ।
                            पैला व्यसन है जुआ खेलणा, सुणलो कान लगाई,
                            मदिरा पान व्यसन दूसरा, तीजा मांस को खाई ।
                            चोरी करना चौथा गिणलौ, हिंसा पांचवी बुराई,
                            वैस्या संग व्यसन है छट्ठौ, यां नै तजदौ भाई ।
                            पर-नारी सूं नेह सातवों, अे सातों दुखदाई । -35/75-6.

 

 

संत

 -1. साधु, सन्यासी या कोई मुनि-महात्मा । 2. साधु की तरह ही कोई त्यागी पुरुष । 3. सज्जन । 4. भक्त । 5. एक मात्रिक छंद विशेष । -33/687.

संत राजारामजी

 -जातिगत संकीर्णता से ऊपर उठकर मातृभाव तथा मानवता का संदेश देने वाले संतों में राजारामजी की विशेष महत्ता हे । लूनी के समीप शिारपुरा में, वि. सं. 1939 की चैत्र सुदि नवमी को, साधारण किसान परिवार में उत्पन्न संत राजाराम ने आध्यात्मिक ज्ञानलोक द्वारा लोक-जीवन को दिशा-दिग्दर्शन करवाया । संत राजाराम का मंदिर शिकारपुरा में स्थित है । संत राजाराम ने आम बोलचाल की भाषा में गहन-गम्भीर ज्ञानामृत लुटाया । काम, क्र्र्रोध, लोभ तथ््रा मोह का परित्याग कर, परमात्मा भक्ति में तल्लीन रहने वाले ऐसे महान संत की वांणियां आज भी मानव-जीवन को सदाचार के पथ पर चलने का संदेश देती है -
            ‘‘सरवर तीर के वृक्ष को काटो मती किसान,
             पंछी बैठे पेड़ पर, सांझ पड़े उड़ आन ।
             पर निंदिया पर धन तजौ, तजौ पराई नार,
             झूठ बोलणौ छोड़ कर, सांचा वचन उछार ।ं -35/75.

 


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