झड़थळ

-डिंगल का एक गीत/छंद विशेष ।  -32/492.  

झड़लपत

-डिंगल का एक गीत विशेष ।     -32/492.

हाड़ौती

-‘हाडा’ चौहानों के राज्य वाला क्षेत्र, वर्तमान में कोटा-बूंदी वाला राजस्थान का क्षेत्र । 2. इस क्षेत्र की बोली । -33/901.
-हाड़ा राजपूतों द्वारा शासित होने के कारण कोटा, बूंदी, बांरां एवं झालावाड़ का क्षेत्र हाड़ौती कहलाया और यहां की बोली हाड़ौती, जो ढूंढाड़ी की ही एक उपबोली है। हाड़ौती का भाषा के अर्थ में प्रयोग सर्वप्रथम केलॉग की हिन्दी ग्रामर में सन् 1875 ई. में किया गया। इसके बाद ग्रियर्सन ने अपने गं्रथ में भी हाड़ौती को बोली के रूप में मान्यता दी। वर्तमान में हाड़ौती कोटा, बूंदी (इन्द्रगढ़ एंव नैनवा तहसीलों के उत्तरी भाग को छोड़कर), बारां (किशनगंज एवं शाहबाद तहसीलों के पूर्वी भाग के अलावा) तथा झालावाड़ के उत्तरी भाग की प्रमुख बोली है। हाड़ौती के उत्तर में नागरचोल, उत्तर-पूर्व में स्यौपुरी, पूर्व तथा दक्षिण में मालवी बोली जाती है। कवि सूर्यमल्ल मिश्रण की रचनाएं इसी बोली में है।

झड़मुगट

-खुड़द सांणोर गीत के अन्तर्गत एक गीत/छंद विशेष ।  -32/492.

तोरावटी

 -झुंझुनूं जिले का दिक्षिणी भाग, सीकर जिले का पूर्वी एवं दक्षिणी-पूर्वी भाग तथा जयपुर जिले के कुछ उत्तरी भाग कोतोरावाटी कहा जाता है। अतः यहां की बोली तोरावाटी कहलाई। काठेड़ी बोली जयपुर जिले के दक्षिणी भाग में प्रचलित है जबकि चौरासी जयपुर जिले के दक्षिणी-पश्चिमी एंव टोंक जिले के पिश्चमी भाग में प्रचलित है। नागरचोल सवाईमाधोपुर जिले के पश्चिमी भाग एवं टोंक जिले के दक्षिणी एवं पूर्वी भाग में बोली जाती है। जयपुर जिले के पुर्वी भाग में राजावाटी बोली प्रचलित है।


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