पहेली

-1. व्यंग, वक्रोक्ति या गूढ़ार्थक वाक्य या शब्द । प्रहेली । 2. परोक्ष अर्थ बोधक वाक्य । -33/51.
-देखें ‘पहेलियां’ ।

मुहावरा-लोकोक्ति

 -मुहावरों और लोकोक्तियों में बड़ा अंतर है । मुहावरा किसी वाक्य का अंश मात्र होता है । उसका स्वतंत्र रूप से व्यवहार नहीं किया जा सकता । जबकि लोकोक्तियां पूर्ण वाक्य होती हैं । उनका प्रयोग स्वतंत्र रूप से भी हो सकता है । वे अपना स्वतंत्र अर्थ रखती हैं । किसी कथन का समर्थन करने के लिये उदाहरण के रूप में अलग से उनका व्यवहार किया जाता
है । मुहावरे गद्यात्मक होते हैं परंतु लोकोक्तियां गद्य और पद्य दोनों में हो सकती हैं । दोनों का ही आकार लघु होता है परंतु मुहावरों का स्वरूप लघुतर होता है । -31/303.

पहेली

 -व्यंग, वक्रोक्ति या गुढ़ार्थक वाक्य या शब्द । प्रहेली । 2. परोक्ष अर्थ बोधक वाक्य । -33/51.
-संसकृत में इसे ‘प्रहेलिका’ कहते हैं । किसी व्यक्ति की बुद्धि परीक्षा के लिये पहेलियां का प्रयोग किया जाता है । वैदिक काल में भी इसकी सत्ता का पता चलता है । वैदिक ऋषियों ने रूपकालंकार का आश्रय लेकर अनेक ऐसी ऋचाओं की रचना की है जो अर्थ की दुर्बोधता के कारण रहस्यात्मक बन गई हैं । जन‘जीवन से संबंध रखने वाली सभी वस्तुओं के विषय में पहेलियां उपलब्ध हैं जिन्हें आठ वर्गों में विभाजित किया है -1. खेती संबंधी, 2. भोज्य पदार्थ संबंधी, 3. घरेलु वस्तु संबंधी, 4. प्राणि जगत् संबंधी, 5. प्रकृति संबंधी, 6. शरीर संबंधी, 7. गणित संबंधी, और 8. प्रकीर्ण पहेलियां । -31/300-1.

मुहावरा

 -विलक्षण व रोचक अर्थ बोध देने वाला शब्द या वाक्य । 2. अभ्यास, आदत । -33/404.
-इसे संस्कृत में ‘वाग्रीतिः’ कहा जाता है । मुहावरे में अर्थ में अभिधेयार्थ से कुछ विभिन्नता होती है । इसके अर्थ  की सिद्धि लक्षणा और व्यंजना शक्तियों के ऊपर अवलम्बित रहती है । अतः मुहावरा किसी बोली या भाषा में प्रयुक्त होने वालावह अपूर्ण वाक्य खण्ड अथवा वाक्यांश है जो अपनी उपस्थिति से समस्त वाक्य को सबल, सतेज, रोचक तथा चुस्त बना देता है । इसकी प्रमुख विशेषता है कि 1. यह किसी वाक्य का अंगीभूत बनकर रहता है । मुहावरे का जब तक किसी वाक्य में प्रयोग नहीं होता तब तक उसका कोई भी अर्थ नहीं रहता । 2. मुहावरा अपने मूल रूप में ही सदा प्रयुक्त होता है । यदि इसमें व्यवहृत शब्दों का पर्यायवाची शब्दों के रूप में प्रयोग किया जाय तो मुहावरा नष्ट हो जाता है । 3. मुहावरे का वाच्यार्थ से विशेष संबंध नहीं होता । लक्ष्यार्थ के द्वारा ही अभीष्ट अर्थ की सिद्धि होती है । मुहावरों में लोक जीवन की झांकी देखने को मिलती है । इसमें जातिगत विशेषताएं परिलक्षित होती हैं । इनमें किसी जाति की सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनैतिक दशा का संकेत मिलता है । इनमें शकुन-विचार की भी पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है ।-31/302-3.

कुम्हारी कहावतें

 -किह्यौड़ौ कुम्हार गधै नी चढ़ै -कहा कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ता ।
-कुम्हार कुम्हारी सूं नीं पड़पै तौ गधा रा कांन पकड़ै -कुम्हार अपनी पत्नी से पार नहीं पाने पर गधे के कान पकडक्ष्ता है ।
-कुम्हार कुम्हारी री झाल गधा माथै काढ़ै -कुम्हार अपनी पत्नी का क्रोध गधे पर निकालता है ।
-कुम्हार-कूटौ नै आधी रा उठौ -कुम्हारी खटपट के लिये आधी रात में उठना पड़ता है ।।
-कुम्हार परथी रौ पŸा राख्यौ -कुम्हार ने पृथ्वी का पŸा रखा ।
-कुम्हार फूटी हांडी में खावै -कुम्हार टूटे बर्तन में खाता है ।
-कुम्हार में तुमार नीं -कुम्हार कला का अंत नहीं ।
-कुम्हार रे घर में फूटी हांडी लाधै -कुम्हार के घर में फूटी हंडिया मिलती है ।
-कुम्हार रै पेट में तोलडि़यौ नीं खटै -कुम्हार के पेट में बात नहीं खटती ।
-कुम्हार री गधी नै घर घर लदी -कुम्हार की गधी घर घर का बोझ ढोती है ।
-कुम्हार री रीस गधेड़ा माथै -कुम्हार की रीस गधे पर निकलती है ।
-कुम्हार रौ गधौ मरै नै धोबण सती व्है - कुम्हार का गध मरता है और धोेबन सती होती है !
-खाया जकां नै माटी खाया, माटी नै कुण ई नीं खाया -खाया जिसको मिट्टी ने खाया, मिट्टी को किसी न नहीं खाया ।
-न्याव रौ पाप है, छŸाीस जांनवर बळै जणै ओ पाकै -न्याव का पाप है, असंख्य प्राणियों के जलने से पकता है ।
-माटा अर माटी तौ कठै ई मिळ जासी -घड़ा और मिट्टी तो कहीं पर भी मिल जायेगी ।
-माटा माथै गरणौ लागै पण दुनिया रै मूंडै नीं लागै -घडे़ के मुंह पर गरना लगता है पर दुनिया के मंुह पर नहीं लगता ।
-माटी अर मांटी नै मोड़ै ज्यूं ई मुड़ै -मिट्टी और स्वामी को मोड़ो वैसे मुड़ जाते हैं ।
-माटी जैड़ी ठीकरी नै मां जैड़ी डीकरी -मिट्टी जैसी ही ठीकरी और मां जैसी लड़की होती है ।

 


Copyright © Rajfolkpedia.com 2016 All rights reserved.                                                                                                                                                                          Website Developed By: Representindia.com