रासमंडळी

-रास नृत्य या रास नृत्य का अभिनय करने वाले कलाकारों का दल, टोली ।   -33/481.

रासमंडळ

-1. रास नृत्य का घेरा या वृत्त । 2. रास नृत्य का स्थान । 3. रास क्रीड़ा करने वालों का समूह ।   -33/481.

ढोल नृत्य

   -विवाह आदि मांगलिक अवसरों पर किया जाने वाला जालोर का ढोल नृत्य राजस्थान का एक प्रमुख लोकनृत्य  है । प्रायः सरगरा, ढोली और भील जातियों द्वारा किया जाने वाला यह नृत्य प्ररूष प्रधान नृत्य है । इस नृत्य में एक कलाकार दो-तीन ढोल अपने शरीर पर रखकर उन्हें बजाता है और कई कलाकार एक साथ मिलकर कई ढोल बजाते हैं । किवदंती है कि जब जालोर बसा था उन्हीं दिनों सिवाणा गांव के खींवसिंह राठौड़ का सरगरा जाति की युवती से प्रेम हो गया और वह सिवाणा छोड़कर जालोर आ गया । यहां आकर खींवसिंह ढोल बजाने लग गया और जालोर का ढोल नृत्य प्रसिद्ध हो गया । जब एक वादक तीन ढोल एक साथ रखता है, तब वह एक अपने सिर पर रखता है, एक सामने की तरफ और एक पीछे रखता है । इन्हें रस्सी से इस तरह बांध दिया जाता है ताकि नर्तक को नाचने और वादन में परेशानी न हो और ढोल खुले नहीं । ढोल लय वादन के साथ नृत्य का यह दृश्य गति और जोशीली भाव-भंगिमाएं प्रस्तुत करती हैं ।                                            -26/26.

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रासधारी

-1.श्रीकृष्ण । 2. रास क्रीड़ा करने वाला । -33/481.

बम नृत्य

-यह नृत्य अलवर भरतपुर क्षेत्र में प्रचलित है । इस नृत्य मेें मुख्य वाद्य एक बड़ा नगाड़ा होता है, जिसे स्थानीय
बोली में ‘बम’ कहते हैं और इसके वादन के साथ किया जाने वाला नृत्य बम नृत्य कहलाता है । यह नगाड़ा आकार में
सामान्य से बहुत बड़ा होता है, जिसे अलवर में ‘टामट’ या ‘टामक’ कहा जाता है जिसकी ऊंचाई लगभग ढाई से तीन फुट
और व्यास लगभग दो-ढाई फुट होता है । इसे दो व्यक्ति अपने दोनों हाथों से मोटे-मोटे डंडों से बजाते हैं । होली के
अवसर पर खेतों में फसल पक जाने की खुशी में यह नृत्य गांव की चैपाल में रात में आयोजित किया जाता है । इस नृत्य
में कई बार दो-तीन बम भी बजाये जाते हैं । यह नृत्य पुरूषों द्वारा किया जाता है । नाचने वाले पुरूष तीन भागों में बंटे
होते हैं । एक समूह नगाड़ा/बम और उसके साथ अन्य वाद्य जैसे थाली, ढोलक, मजीरा आदि बजाने वालों का होता है ।
दूसरे समूह के लोग वाद्य कलाकारों के पास ही रंग-बिरंगे कपड़ों और चमकीली गोटा-किनारी वाले पंखे और छडि़़यां लिये
होते हैं । तीसरा समूह ‘बम’ के सामने आकर नृत्य करने वालों का होता है । ये नृर्तक अपनी धुन में मस्त बम की चोटों के
साथ नृत्य करते हैं । -26/25

 


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