बाल गीत

-बच्चों के गीत । बालक संबंधी गीतों का वर्गीकरण तीन श्रेणियों में किया जा सकता है -1. लोरी, 2. पालने के गीत, और 3. खेलने के गीत । जब बच्चा छोटा होता है तब मातायें उन्हें सुलाने के लिये लोरियां गाती हैं जिससे वे शीघ्र ही निन्द्रा की गोद में चले जाते हैं । पालने में बच्चों को सुला कर जो गीत गाये जाते हैं उन्हें पालने के गीत कहा जाता है । तीसरे प्रकार के बालगीत वे हैं जिनका उपयोग बालक खेलों को खेलते समय किया करते हैं । गुजराती लोक साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान श्री झवेर चन्द मेघाणी ने उक्त बालगीतों को दस वर्गों में विभक्त किया है- 1. चलने-कूदने के गीत, 2. बैठे-बैठे चलने के गीत, 3. बच्चों को बुलाने के गीत, 4. ऋतु संबंधी गीत, 5. पशु-पक्षी संबंधी गीत, 6. चांदनी रात के गीत, 7. कथा संबंधी गीत, 8. व्रत संबंधी गीत, 9. गरबा के गीत, 10. रास के गीत, आदि । -31/306-7.

पंखेरू गीत

 -पक्षी गीत ।
-राजस्थानी धोरों में गूंजते अत्यंत प्रिय एवं प्रसिद्ध पंखेरू गीत हैं- ‘आड, कबूतर, कमेड़ी, काग, कागली, काबर, काळचिड़ी, कुरजां, कोचरी, कोयल, गिरज, गेगरी, गोडावण, चकवा-चकवी, चमचेड़, टींटोड़ी, तिलोर, तीतर, दौडो, पटेबड़ी, पीयल, बइयो, बुगलो, मोर, सांवळी, सारस, सुगनचिड़ी, सूवो, होळावो आदि । इनमें से कुछ अंचल विशेष तक सीमित है और कुछ सार्वभौम स्वरूप् लिये हुए । विषय वस्तु की दृष्टि से इन पंखेरू गीतों को इन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है -1. वर्णनात्मक गीत, 2. शकुन गीत और 3. प्रेम भरे सम्बोधन गीत ।    -25/245-6.

लोकगीत -हिचकी (भैरवी )

-आवै रे हिचकी,
वेरण आवै हिचकी
म्हांरौ वादीलौ चितारै,
वेरण आवै हिचकी
अरे नैना कण रौ बाजरौ
चिडि़यां चुग चुग जाय
अरे म्हैं थन्नै ढोला मना कियौ
तूं परदेसां मत जाय,
वेरण आवै हिचकी....
म्हनै सूनौ लागै डागळौ
म्हारौ गढ़ सूनौ गिरनार,
अरे चढ़ चढ़ जोवूं डागळै/ ऊभी जोवूं वाटड़ी
म्हारौ कद आवै भरतार,
वेरण आवै हिचकी......
भाकर खुड़कै बेलड़ी
रे मांइयै काळोड़ौ सांप,
अरे भंवरसा खा दी थी पण ऊबरी
सांवरिया थारौ भाग,
वेरण आवै हिचकी......

ससुई-पनो

 -विरामणांरै बेटी हुई । जोतसियां कह्यो इणरो पत मळेछ हुसी । जद सिंदूकमें घाल दरियामें बहाय दिवी । आगै धोबी बड़ो धनवान हो, उण पाळ मोटी किवी । नाव ससुई दियो । केचमें बलोचांमें जातहोत वंसमें पनो होत हुवो । विण केचसूं आण ससुई परणी। 15/211.

लोकगीत -मेंहदी मलीर: (पहाड़ी )

-संवर डाळा मेंहदी सवाया
म्ेंाहदी सां हत्थड़ा लाल,
म्हांरी अे मेंहदी ओ मलीर
धीमा इत्थै कुण लाया
आज रे हरियालौ वनड़ौ
जांनीड़ा सिणगारै,
जांनीड़ो घोळियौ सौ रौ नोट
म्हांरी मेंहदी ओ मलीर.....
आज रे हरियालौ वनड़ौ
घोड़लिया सिणगारै,
अरे घोड़लियां री डवडी हींस
म्हांरी मेंहदी ओ मलीर......
आज रे हरियालौ वनड़ौ
करहलिया सिणगारै,
करहलियां दीनी डवडी झोक
म्हांरी मेंहदी ओ मलीर.....
आज रे हरियालौ वनड़ौ
मांमलिया तेड़ाया,
मांमलियां रे राखियौ डोडौ मांन
म्हांरी मेंहदी ओ मलीर.....
आज रे हरियालौ वन्नौ
बेनडि़यां तेड़ावै
बेनडि़यां घोळियौ सौ रोै नोट
म्हांरी मेंहदी ओ मलीर......


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