पतंगबाजी

-पतंग उड़ाने की क्रिया, हौड़, प्रतिस्पर्धा ।  -33/21.

पचेटौ

-पांच गोली का एक खेल विशेष ।   -33/15.

चौपड़

 -1. चौसर से खेलने का चार पट्टियां का खेल । 2. चौसर के खाने के अनुसार पलंग की बुनावट । 3. चौराह । -32/417.
-यह खेल कपड़े की गुणिताकार बिसात पर खेला जाता है । इसकी प्रत्येक भुजा आठ-आठ वर्गों में विभक्त होती है जिनमें 12 वर्ग लाल तथा 12 वर्ग काले होते हैं । केन्द्र में जहां चारों भुजाएं मिलती हैं काले रंग का एक बड़ा वर्ग होता है । इस खेल को चार खिलाड़ी अलग-अलग रंग की चार-चार गोटियों से या दो खिलाड़ी आठ-आठ गोटियों से खेलते हैं । प्रत्येक व्यक्ति उन आयलों के सामने बैठ जाता है । गोठियों का संचालन सात कोड़ियों को पासे के रूप में फैंककर निर्धारित किया जाता है । इनकी गणना चित्त या पुट पड़ने के अनुसार होती है । बारी-बारी से कोड़ियां फैंकी जाती है । यह खेल उस समय तक चलता रहता है जब तक चार में से तीन खिलाड़ी अपनी गोटियों को बिसात के चारों ओर घुमाने में सफल न हो
जावें । -23/190.

भांडाई

-1. निंदा करने की क्रिया या भाव । 2. भांड द्वारा किया जाने वाला स्वांग रचना का कार्य । 3. निंदा । -33/277.

 

शतरंज

-यह एक राजस्थानी खेल है जिसमें 64 खाने बने कपड़े पर खेला जाता है । प्राचीन काल में इसका नाम चतुरंग था जो चार व्यक्तियों द्वारा खेला जाता था । बाद में यह दो व्यक्तियों द्वारा खेला जाने लगा व इसका नाम शतरंज हो गया । यह खेल दो बादशाहों के मध्य मुकाबले का होता है । प्रत्येक बादशाह अपनी सेना- हाथी, घोड़े, ऊंट, मंत्री व सैनिकों की
सहायता से तथा युद्ध की कूटनीतिक चालों से विपक्षी को हराता है । यह खेल बुद्धि पर ज्यादा आधारित होता है । इसमें पूर्ण विश्रांति तथा तन्मयता की आवश्यकता होती है । इस खेल में लोग इतना तन्मय हो जाते हैं कि वे इसमें अन्य सब कार्य भूल जाया करते हैं । -23/189-90.


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