सैवी

-पार्वती , दुर्गा । 2. मनसादेवी । 3. कल्याणी ।    -33/851.

जळधरी

-1. पत्थर या धातु की बनी अर्धा जिस पर शिवलिंग स्थापित किया जाता है ।  -32/455.

गाजन माता

-बणजारों की कुल देवी ।   -32/325.

पोढ़ीनाथ

-रामदेव तुंवर नामक सिद्ध का एक नामान्तरण ।     -33/102.  

अंबामाता

-उदयपुर में अंबामाता के प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण महाराणा राजसिंह ने करवाया था । चित्तौड़ दुर्ग में जो महल ‘कालिकाजी’ को प्राप्त है वह उदयपुर में अम्बामाता को प्राप्त है । इस प्रमुख शक्ति स्थल ‘अंबामाता’ में बलिदान की विशिष्ट परंपरा थी। यहां नवरात्रि के अलावा वर्ष भर बिना नागा प्रातः 4 बजे खाजरू का निमय था । यह खाजरू प्रतिदिन महलों से 4 व्यक्तियों (बलिदान करने वाला, पशु गायत्री मंत्र सुनाने वाला, चौकी का सरदार एवं एक खटीक -जिसके पास एक तलवार और एक लालटेन रहती थी) के साथ किश्ती से लाया जाता था । अंबामाता के नित्य बलिदान का नियम इतना पक्का था कि एकादशी, पूर्णिमा को तो होना ही था, परन्तु महाराणा के देवलोक होने पर भी इसमें व्यवधान नहीं होता था ।-1/ 27.


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