सिंझारौ

 -1. श्रावण कृष्णा तृतीया का पर्व दिन । 2. इस अवसर पर कन्या या वधू के लिये भेजा जाने वाला सामान । -33/777.
-देखें ‘सिंजारौ’ ।

सिंजारौ

 -मेवांड़ में ‘सिंजारा’ लाड़ लडाने एवं आत्म संतुष्टि का प्रतीक है । विवाहोत्सव संस्कार में तिलक दस्तूर के बाद यदि विवाह की तिथि में विलम्ब हो और बीच में श्रावणी तीज अथवा गणगौर जैसे मुख्य सांसकृतिक पर्व पड़ रहे हों, तब वरपक्ष की ओर से कन्यापक्ष के लिये ‘‘सिंजारे’’ के दस्तूर की परंपरा है । इसमें दुल्हन के लिये तीज पर ‘लेहरिया की पोशाक’ और गणगौर पर ‘फागणिया की पोशाक’ के साथ मेवा-मिष्ठान्न भेजे जाते हैं । -1/56.
-देखें ‘सिंझारौ’ ।

नंदप्रयाग

 -बदरिकाश्रम के समीप एक तीर्थ ।

सिंगरौर

-प्रयाग के पश्चिमोत्तर में स्थित एक तीर्थ । -33/776.

सूरजकुंड

-1. आबू का एक तीर्थ स्थान । 2. श्मशान भूमि का जलाशय या तालाब ।  -33/837.

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