हरियाली तीज

-श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया । देखें ‘तीज’ ।

अनन्त चतुर्दशी

 -यह व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है । भगवान का रूप अनन्त है, इसी तथ्य को दर्शाने के लिये यह व्रत किया जाता है । इस दिन केवल दोपहर तक ही उपवास किया जाता है । मध्यान्ह में भगवान अनन्त की कथा सुनकर इस व्रत की समाप्ति होती है । इस दिन सूत में अनेक गांठे दे कर एक ‘सूत्र’ तैयार किया जाता है जिसे लोग अपनी बाहों में पहिनते हैं । -31/167.

पर्व

 -1. निर्दिष्टकाल, अवधि । 2. पूर्णिमा, अमावस्या और संक्राति । 3. देव पूजन या व्रत उपवास की तिथि विशेष । 4. उत्सव, पुण्यकाल । 5. अवसर, मौका । 6. त्यौहार । 7. यज्ञादिक उत्सव । 8. चन्द्र या सूर्य ग्रहण । -33/36. 

भाई दूज

-यह व्रत कार्तिक शुक्ल द्वितीया को किया जाता है । इस व्रत का प्रधान उद्देश्य भाई और बहिन में परस्पर प्रेम की वृद्धि करना है । इस दिन भाई अपनी बहिन के घर जाता है और वह प्रेम से उसे मिष्ठान खिलाती है । भाई ‘नेग’ के रूप में उसे वस्त्र तथा द्रव्य आदि प्रदान करता है । -31/167.

गोपाष्टमी

 -कार्तिक शुक्ल अष्टमी ‘गोपाष्टमी’ के नाम से प्रसिद्ध है । इस दिन गाय तथा गोवंश -बैल, बछड़ा आदि की विशेष रूप से पूजा की जाती है । बैलों के सींग तथा खुर में तेल लगाया जाता है । माथे पर सिंन्दूर का टीका लगाकर इन्हें माला पहिनाई जाती है । इस दिन गायों की फूल-माला से पूजा कर उन्हें मिष्ठान खिलाया जाता है । इस दिन दो बैलों का एक साथ दर्शन शुभ माना जाता है । -31/88, 90.

 


Copyright © Rajfolkpedia.com 2016 All rights reserved.                                                                                                                                                                          Website Developed By: Representindia.com