रिखपांचम

 -भादव शुक्ला पंचमी तिथि । ऋषि पंचमी ।
-सप्त ऋषियों एवं पूर्वजों के प्रति आस्था व्यक्त करने के उपलक्ष्य में कायस्थ, ब्राह्मण, माहेश्वरी समाज में बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं । इस दिन जोधपुर में चांदपोल के बाहर भूतेश्वर वनक्षेत्र स्थित ‘मिनका नाडी’ की पाल एवं पदमसर जलाशय पर ब्राह्मण समाज की युवतियों व महिलाओं ने सप्त ऋषियों एवं सप्त पत्नियों के नाम सगोत्र शास्त्रोक्त विधि से तर्पण कर मोक्ष की कामना करती हैं । ऋषि पंचमी के दिन कुंवारी कन्या, सुहागन स्त्री, विधवा महिलाएं सभी व्रत रखकर सप्त ऋषियों सहित अपने ससुराल-पीहर के तीन पीढ़ी तक के सभी दिवंगत परिजनों के नाम का तर्पण करती हैं । इस तर्पण कार्यक्रम में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है । तर्पण के बाद नीम, आक, पीपल वृक्ष का पूजन कर पौराणिक कथाओं का श्रवण किया जाता है । पूजन के बाद ‘‘मणीचा’’ (बिना बोया धान) की खीर, तुरई- काचरे की सब्जी, केर-सांगरी का रायता पितरों को अर्पित कर व्रत का पारणा करती हैं । -राजस्थान पत्रिका, जोधपुर पृ.5, 27.08.2017.

पंच पुसप

-चंपा, आम, शमी, कमल और कनेर के फूल ।   -33/3.

पंच नदी

-रावी, सतलुज, व्यास, चिनाब और झेलम । -33/3.

पंच नाथ

-बदरीनाथ, द्वारकानाथ, जगन्नाथ, रंगनाथ औैर श्रीनाथ ।   -33/3.

पंच देच वृक्ष

-मंदार, पारिजात, संतान, कल्प व हरिचंदन वृक्ष ।    -33/3.

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