पग मंडणा

 -अतिथी के स्वागतार्थ बिछाया जाने वाला वस्त्र । मेवाड़ में महाराणा के पधारने पर दरवाजे पर परंपरिक ढोल-नगारे से महाराणा को ‘पग मंडणा’ बिछा कर पधराया जाता था, परिवार की महिलाएं कलश-आरती करती थीं । यह लाल टूल मलमल की लंबी पट्टी होती है । इसके बीच में बाजोठ रहता है जहां रुक कर चांदी के थाल में पद प्रक्षालन किया जाता है । बाद में यह ‘पगमंडणा’ दरबार के मर्दनिये को नेग में मिलता है तथा नछरावळ के रूप में संबंधित कमीण-कारू (भोई, महावत, चरवादार, छड़ीदार आदि) में वितरित होते हैं । -1/62.

भेलेरा री गोठ

-मेवाड़ में विवाह के बाद एक पारिवारिक ‘जीमण’ का आयोजन किया जाता है जिसमें ऐसी मान्यता है कि नववधू को विधिवत् परम्परानुसार परिवार की सदस्यता प्रदान की जाती है ।  -1/59.

लाखीणी बींदणी

-विवाह के दस-प्रन्द्रह दिन बाद एवं पीहर भेजने से पूर्व एक दिन शुभ मुहूर्त में लखारण को बुलाकर ‘लाख की चूड़ियां’ पहनाने का दस्तूर किया जाता है । इस तरह ‘लाख का चूड़ा’ पहनाकर बींदणी को ‘लाखीणी’ करने की परंपरा है । उस दिन गाना-बजाना, गीत-गाळ होता है ।   -1/59.

लाखीणी

-दुल्हिन के पहनने की लाख की चूड़ी । -वि. लाखों की । 2. अति कीमती या महत्वपूर्ण । -33/527.

लांवण

-स्त्रियों के लहंगे या घाघर का निचला किनारा । 2. ऋतुमति स्त्रियों के संसर्ग से कुछ वस्तुओं में होने वाला विकार ।-33/526. 

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