साळा-कटारी

-मेवाड़ राजकुल विवाहोत्सव संस्कार में हथलेवा दस्तूर के बाद मंडप में ही ‘साळा-कटारी’ की पारिवारिक रस्म के तहत वधू का छोटा भाई जो रिश्ते में वर का साळा होता है, आ कर वर के घुटने पर बैठ जाता है । उसे सोने की कटारी वर की तरफ से दी जाती है, तभी वह उठता है ।  -1/51. 

कन्यावळ

 -कन्या के विवाह के दिन पाणिग्रहण होने तक रखा जाने वाला व्रत । कन्यादान । -32/195.
-कन्या के माता-पिता एवं निकटतम बंधु-बांधव कन्यादान होने तक जीमण नहीं जीमते एवं सगार, फलाहार ही करते हैं । इसे मेवाड़ी में ‘‘कन्यावळा’’ कहा जाता है । -1/51.

रंग बंटायी

-विवाहोत्सव संस्कार में ‘रंग बंटायी’ का अभिप्राय हथलेवे में प्रयुक्त की जाने वाली मेंहदी को तैयार करना होता है । यह कार्य उपस्थित समुदाय में से उस सौभाग्यशाली युगल से करवाया जाता है जिसका पति-पत्नी संबंध और प्रेम गाढ़ा और जग जाहिर होता है । मेवाड़ राजकुल में चांदी की थाली में नारियल से सूखी मेंहदी को वो दोनों जने हाथ लगा कर साथ-साथ पीसने का दस्तूर करते हैं । इस युगल को परंपरानुसार नेद दिया जाता है ।  -1/51. 

हथबोलणौ

-1. नवागन्तुक वधू के प्रथम परिचय संबंधी एक रश्म जिसमें घर की सब स्त्रियां नव वधू के साथ भोजन करती हैं । 2. इस अवसर के लिये बनाया जाने वाला खाद्य पदार्थ । -33/882. 

सासू छाबड़ी

-दहेज के समय कन्या पक्ष की ओर से वर की माता को दी जाने वाली पोशाक । 2. ऐसी पोशाक रखने की टोकरी ।-33/774.

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