अंधविश्वास साथ शकुन

- राजस्थानी  लोगों के दिल दिमाग में भांति भांति के जादू-टोने भरे पड़े हैं । भोजनोपरांत अंगड़ाई लेने से खाना गधे के पेट में चला जाता है । बच्चों को छतीय नाले के नीचे बैठाने से उस पर बायांजी बह जाती है । थावर या अदितवार के दिन चालणी सिर पर लेने से सिर में ‘दुखणिये’ हो जाते हैं । कोई व्यक्ति कभी किसी यात्रा के लिये तैयार होता है उस समय उसको विदा देने से पहले घर वाले बिल्ली से दही झुठवा कर खिलाते हैं । उसी समय यदि कुत्ता कान फड़फड़ा जाये तो सब उपस्थित लोग थूकते हैं और उसकी यात्रा बंद कर देते हैं । हमारे यहां रात्रि में तारे का टूटना/उल्कापात भी विघ्नमूलक माना जाता है । टूटता तारा किसी को दीख जाये तो वह उसकी दोष निवृत्ति हेतु मुंह ब्ंाद कर तीन बार राम राम बोलता है । रात में कोवै का और दिन में सियारों का बोला जाना भी देश के किसी बड़े आदमी की मृत्यु या अकाल के सूचक समझे जाते हैं । विवाह के समय संबंधी को खटाई नहीं खिलाई जाती क्योंकि सगे खट्टे न पड़ जांय । विवाह के बाद वापस घर आते समय जब बारात ग्राम सीमा पर पहुंचती है तो नारियल बधारकर उसकी चिटकियांे के चार टुकड़े वरवधू के हाथों से सीमा पर चढ़वाते हैं, तब कहीं सीमा में घुस पाते हैं । सीमा देव के बाबत ऐसे अनेक अंधविश्वास पलते हैं । यह सब भोमिया, खेतरपाळ एवं पितृ के संबंध में होते हैं । समय पर वर्षा के न होने से उक्त देवों को बळ-बाकळ भी चढ़ाये जाते हैं । ऐसा करने से पानी बरसने की उम्मीद बंधती है । यह विश्वास अलौकिक यक्षों के स्थान पर लोक वीर एवं लोक पीर पूजा का नमूना है । -20/247-8.


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