आंबेर/आमेर

-कछवाहों की पुरानी राजधानी आम्बेर का दुर्ग पर्वत श्रृंखलाओं से परिवेष्टित है । सुदृढ़ प्राचीर और विशाल प्रवेश द्वार इन सबने मिलकर उसे एक दुर्भेद्य दुर्ग का रूप दे दिया है । किले के नीचे मावटा और दलाराम का बाग उसके सौंदर्य को द्विगुणित कर देते हैं । -25/194.
-एक प्रकार की बंदूक ।...जयपुर से छः मील दूर पूर्व दिशा में एक कसबा जो जयपुर की प्राचीन राजधानी होने के कारण प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थान है । -18/253,55.
-आंबेर थाप-उथापरा धणी खंगारोत नाथावत है । सेखावत नरूका नगारा रा चाकर है ।....आंबेर सात उमराव जिके सातां किलेदार है । किलेदारी उतरै नहीं । 15/127.
-आंबेरमें मुदे मानका केकानरा पोता पारीक पुरोहित कछवाहांरा गुरु है । 15/126.

 


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