आबू

-राजस्थान के अरावली पहाड़ के दक्षिणी छोर पर बसा एक नगर । अरावली पहाड़ का एक हिस्सा । -18/297.
-आबू पंवारांरी ठाकुराई हुती । तद आबूथी कोस .. ऊमरणी छै तठै सहर वसतो । पछै वीजड़रा बेटा 5 महणसी, आल्हणसी.. वीजड़रा बेटा- जसवंत, समरो, लूणो, लूंभो, लखो, तेजसी -अे लोग गूढ़ो कर रह्या था । पछै पंवारांसूं सगाई देणी कीवी । 25 सांवठी दी । एक भाई ओळ रह्यो (धन की एवज में एक भाई को उनकी चाकरी में रखा) । पछै वे जांन कर आया । सगळांनूं डेरा दिराया । परणीजणनूं जुदा बुलाया । भला रजपूतांनूं बैरां रा वेस पहराया । पछै परणाय सुवण मेलिया । तठै के चंवरियां मांही पचीस सिरदार मारिया । नै जांनीवासै साथ उतरियो उणनूं अमलपांणियां मांहै काई बळाई दी सु वे छकिया तरै कूट मारिया । ओळ दियो थो उण उठै वांसै सिरदार थो तिणनूं मारियो । आबू ऊपर चढ़ दौडि़यो । आबू हाथ आयो । सं. 1216 रा माह वद 1 पंवारांसूं गयो ।...चहुवांण वीजड़रो बेटो तेजसी पाट बैइौ । 10/123-170.
-जांगळी नामे भील राठोड़ राजानूं बेटी परणाय आबू दियो । राठोड़ कनांसूं आबू गोहिलां लियो । देायसै वरस गोहिलां रै रही । गोहिलां कनासूं परमारां लियी । परमारां कनासूं पीतू देवड़ै लियो । 15/204.


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