संभ्रांत साहित्य

 -संभ्रांत वर्गीय साहित्य से तात्पर्य उस शिष्ट साहित्य से है जिसका सृजन शास्त्राय परम्पराओं के अनुरूप किया गया हो । ऐसे साहित्य का सृजन और पठन-पाठन का प्रचलन संभ्रांत वर्गीय लोगों में ही प्रायः अधिक रहा है, अतः इसे इस नाम से संबोधित किया जा सकता है । दूसरे शब्दों में इसे शिष्ट साहित्य या शास्त्रीय साहित्य भी कह सकते हैं । इस संभ्रांत वर्गीय साहित्य को मोटे रूप से दो प्रमुख भागों में बांटा जा सकता है- 1. चारण साहित्य, और 2. चारणेत्तर साहित्य । -35/130.


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